प्लास्टिक बैग्स को ना कहें:

 3 Rs को रखें याद:

  • Reduce (रिड्यूस): गाँधी जी ने कहा था-पृथ्वी सभी मनुष्यों की ज़रुरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन लालच पूरी करने के लिए नहीं.
पर ज्यादातर लोग ज़रुरत से अधिक के चक्कर में पड़ जाते हैं…एक मोबाइल चल रहा है…लेकिन दूसरा चाहिए…एक कार सही है लेकिन दूसरी चाहिए…एक बाल्टी से नहा सकते हैं लेकिन पूरा बाथटब चाहिए…”
अगर पृथ्वी को बचाना है तो अपनी आदतों को सुधारना होगा…अपने फ़ालतू के usage को घटाना होगा।
  • Reuse (रियूज): बहुत सी चीजें हैं जिनका हम नहीं तो कोई और इस्तेमाल कर सकता है। जैसे कि पुराने किताबें, कपड़े, मोबाइल, कंप्यूटर इत्यादि। इन्हें ऐसे लोगों को दे दें जो इन्हें प्रयोग कर सकें। और आप भी अगर अपने यूज के लिए कहीं से कुछ प्राप्त कर सकें तो उसे लेने में झिझकें नहीं या शर्मिंदगी ना महसूस करें।
  • Recycle (रीसायकल): प्लास्टिक non-biodegradable है। अगर इसको जलायेंगे तो इससे डायोक्सिन तथा फ्यूरौन जैसे रसायन हवा के जरिये हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और गंभीर बीमारयों को न्योता देते हैं। इसलिए ऐसी चीजों को रीसायकल करना बहुत ज़रूरी है।

2. पेड़ लगाएं:

ये आप अच्छी तरह से जानते हैं, पर करते नहीं हैं। एक काम करिए इस बार जब आपका बर्थडे आये या आपके बच्चे का बर्थडे आये तो उस दिन एक पेड़ लगाइए और उसका कोई नाम रखिये…आपके या आपके बच्चे के साथ उसे भी बड़ा होते देखिये!

. प्लास्टिक बैग्स को ना कहें:

Shopping के लिए Polythene या plastic bags का प्रयोग बंद कर दें। और इसके लिए किसी क़ानून का इंतज़ार मत करें, खुद से ये कदम उठाएं…. सब्जी के लिए, राशन के लिए, या कुछ भी बाज़ार से लाने के लिए पेपर बैग्स या कपड़ों के बने झोलों का प्रयोग करें।

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